कार्यस्थल पर संस्कृति और अपनापन बढ़ाने वाले वेलनेस चैलेंज

लीडरबोर्ड से अपनेपन तक: जब वेलनेस चैलेंज बनाते हैं कार्य-संस्कृति

YuMuuv में हमने अनगिनत केस स्टडी की हैं, और एक बात बार-बार सामने आती है। कंपनियाँ शुरुआत भले ही किसी वेलनेस चैलेंज से करें, लेकिन बाद में मिलने वाला फ़ीडबैक शायद ही सिर्फ़ उस चैलेंज तक सीमित रहता है। अक्सर बात कदमों, पॉइंट्स या लीडरबोर्ड से आगे निकल जाती है। लोग ज़्यादा बातचीत करने लगते हैं। टीमें नए तरीकों से जुड़ती हैं। जो सहकर्मी आम तौर पर सिर्फ़ Slack पर संदेश भेजते थे, वे साथ टहलने, लंच ब्रेक लेने या थोड़ी देर हालचाल पूछने के लिए मिलने लगते हैं। एक साधारण गतिविधि के रूप में शुरू हुई चीज़ अक्सर कार्य-संस्कृति का हिस्सा बन जाती है।

वेलनेस चैलेंज की यह कहानी शायद ही कोई सुनाता है। हम स्वास्थ्य में सुधार, भागीदारी दर और निवेश पर रिटर्न की बात करते हैं। लेकिन इस बात पर कम ही चर्चा होती है कि सोच-समझकर बनाया गया चैलेंज वह कर सकता है, जो कार्य-संस्कृति सुधारने की ज़्यादातर पहल नहीं कर पातीं: लोगों को ऐसी टीम का हिस्सा महसूस कराना, जहाँ सब सचमुच एक-दूसरे की परवाह करते हैं।

अपनेपन की कमी असली समस्या है — और महँगी भी

ज़रा बड़ी तस्वीर देखें। 2023 में अमेरिका के सर्जन जनरल Dr. Vivek Murthy ने 82 पन्नों की एक एडवाइज़री जारी की, जिसमें अकेलेपन और अलगाव को सार्वजनिक स्वास्थ्य की महामारी घोषित किया गया। अमेरिका के लगभग आधे वयस्क मापने योग्य स्तर के अकेलेपन का अनुभव कर रहे थे। एडवाइज़री के मुताबिक, सेहत पर इसके नतीजे चौंकाने वाले हैं — सामाजिक जुड़ाव की कमी से मृत्यु का जोखिम उतना ही बढ़ता है, जितना रोज़ 15 सिगरेट तक पीने से।

एडवाइज़री सिर्फ़ निजी जीवन तक सीमित नहीं थी। इसमें खास तौर पर कार्यस्थलों से ऐसी संस्कृति बनाने को कहा गया, जो "लोगों को सिर्फ़ उनके कौशल के आधार पर नहीं, बल्कि एक संपूर्ण इंसान के रूप में एक-दूसरे से जुड़ने दे।" ये शब्द अहम हैं। सर्जन जनरल का कार्यालय असल में कह रहा है कि अगर आपका कार्यस्थल सच्चे मानवीय जुड़ाव को बढ़ावा नहीं देता, तो वह सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक समस्या में योगदान दे रहा है।

कारोबारी नज़रिए से भी यही तस्वीर दिखती है। BetterUp के शोध ने लगभग 10,000 कर्मचारियों के डेटा के आधार पर पाया कि कार्यस्थल पर अपनेपन की गहरी भावना से काम के प्रदर्शन में 56% बढ़ोतरी, नौकरी छोड़ने के जोखिम में 50% कमी और बीमारी की वजह से ली जाने वाली छुट्टियों में 75% कमी आती है। शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, 10,000 कर्मचारियों वाली कंपनी के लिए इसका मतलब हर साल $52 मिलियन से ज़्यादा की बचत है।

वहीं, Gallup के स्टेट ऑफ़ द ग्लोबल वर्कप्लेस शोध के अनुसार, दुनिया भर में लगभग हर पाँच में से सिर्फ़ एक कर्मचारी अपने काम से जुड़ाव महसूस करता है। इस कम जुड़ाव की कीमत वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल करीब $10 ट्रिलियन चुकानी पड़ती है। कर्मचारी जुड़ाव पर हुए शोधों के Gallup के व्यापक मेटा-विश्लेषण में गहरे जुड़ाव वाली टीमों का संबंध कहीं अधिक मुनाफ़े और उत्पादकता से पाया गया है। अपनापन, काम से जुड़ाव की सबसे मज़बूत नींवों में से एक है।

इसलिए सवाल यह नहीं है कि अपनापन मायने रखता है या नहीं। सवाल यह है कि आप इसे कैसे बढ़ाएँ — खासकर हाइब्रिड और अलग-अलग जगहों से काम करने वाली टीमों में, जहाँ लोग शायद कभी एक ही गलियारे से भी न गुज़रें, साथ लंच करना तो दूर की बात है।

वेलनेस चैलेंज अनायास संस्कृति कैसे बनाते हैं

कार्य-संस्कृति बनाने के साधन के रूप में वेलनेस चैलेंज की दिलचस्प बात यह है कि उन्हें कोई इस तरह पेश ही नहीं करता। आप पर्याप्त पानी पीने या अच्छी नींद का चैलेंज इसलिए शुरू करते हैं क्योंकि आप चाहते हैं कि कर्मचारी ज़्यादा स्वस्थ रहें। लेकिन असल में जो होता है, उसमें सामाजिक जुड़ाव की भूमिका कहीं बड़ी होती है।

जब कोई टीम मिलकर एक साझा लक्ष्य की ओर काम करती है — भले ही वह ज़्यादा पानी पीने या ज़्यादा चलने जितना आसान हो — तो कुछ ऐसी प्रक्रियाएँ शुरू हो जाती हैं, जिन्हें किसी और तरीके से पैदा करना मुश्किल है।

एक साझा पहचान बनती है। टीम सिर्फ़ एक ही मैनेजर को रिपोर्ट करने वाले लोगों का समूह नहीं रह जाती। वह "मार्च में 20 लाख कदम चलने वाली टीम" बन जाती है। सुनने में यह छोटी बात लग सकती है, लेकिन साझा उपलब्धियाँ — चाहे मामूली ही क्यों न हों — साझा किस्सों के ज़रिए लोगों को जोड़ती हैं। लोगों को कुछ ऐसा मिल जाता है, जिसका वे ज़िक्र कर सकें, जिस पर हँस सकें और जिस पर मिलकर गर्व कर सकें।

खुलकर इंसान बनने की जगह मिलती है। वेलनेस चैलेंज लोगों को काम के अलावा दूसरी बातें करने का एक सहज और स्वीकार्य बहाना देता है। नींद की आदतें, टहलने के पसंदीदा रास्ते, तनाव सँभालने के तरीके — ये बातचीत ऐसे दरवाज़े खोलती है, जो तिमाही बिज़नेस समीक्षाएँ कभी नहीं खोल सकतीं। और जब लोग अपनी ज़िंदगी की बातें साझा करने लगते हैं, तो भरोसा भी बढ़ता है।

बिना बड़े दबाव के सहयोग होता है। हर कोई भारी दबाव वाले प्रोजेक्ट में अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पाता। वेलनेस चैलेंज में सहयोग तो होता है, लेकिन करियर दाँव पर नहीं होता। यह शांत स्वभाव वाले साथियों को योगदान देने, नए कर्मचारियों को घुलने-मिलने और अलग-अलग विभागों के लोगों को सहजता से जुड़ने का मौका देता है। इससे कोई प्रदर्शन समीक्षा नहीं जुड़ी होती। दबाव दोस्ताना होता है, पेशेवर नहीं।

परवाह साफ़ दिखती है। जब कोई संगठन वेलनेस चैलेंज में निवेश करता है, तो वह एक संदेश देता है। यह नहीं कि “हमने आपके लिए एक सुविधा खरीदी है,” बल्कि यह कि “हमें लगता है कि आपकी सेहत और खुशहाली हम सबके ध्यान के योग्य है।” लोग सिर्फ़ अकेले स्वस्थ नहीं रहना चाहते। वे साथ मिलकर स्वस्थ रहना चाहते हैं।

लीडरबोर्ड मकसद नहीं है (पर मदद करता है)

यहाँ सच कहना ज़रूरी है — लीडरबोर्ड की छवि कुछ खराब है, और कुछ हद तक इसकी वजहें सही भी हैं। खराब तरीके से तैयार की गई प्रतिस्पर्धा उन लोगों को अलग-थलग कर सकती है, जिनका स्वभाव प्रतिस्पर्धी नहीं है या जो शारीरिक रूप से दूसरों की बराबरी नहीं कर सकते। सार्वजनिक रैंकिंग में सबसे नीचे कोई नहीं रहना चाहता।

लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर लीडरबोर्ड का मकसद सिर्फ़ प्रतिस्पर्धा नहीं होता। वे योगदान को सामने लाते हैं। वे कोशिशों को पहचानने लायक बनाते हैं। जब आपकी टीम देख सकती है कि हर कोई योगदान दे रहा है — कि अकाउंटिंग वाले सहकर्मी ने अपने पानी पीने का रिकॉर्ड दर्ज किया और इंजीनियरिंग के नए कर्मचारी ने अपनी आभार डायरी साझा की — तो सबको मिलकर आगे बढ़ने का एहसास होता है।

कुंजी ऐसे चैलेंज बनाने में है, जहाँ सबसे आगे रहने से ज़्यादा योगदान मायने रखे। व्यक्तिगत रैंकिंग के बजाय टीम का औसत। पॉइंट्स कमाने के कई तरीके — कदम, माइंडफुलनेस में बिताए मिनट, भलाई के काम, सीखने के लक्ष्य। सिर्फ़ सबसे अच्छे प्रदर्शन का नहीं, नियमित कोशिशों का भी जश्न। जब लीडरबोर्ड सिर्फ़ खेल-कूद की क्षमता के बजाय कोशिश और भागीदारी दिखाता है, तो उसमें हर किसी के लिए जगह होती है। और यही समावेश अपनेपन का रास्ता खोलता है। YuMuuv में इसका मतलब है औसत के आधार पर बनने वाले टीम लीडरबोर्ड, अलग-अलग गतिविधियों के लिए वेलनेस पॉइंट्स, साझा लक्ष्य और चैलेंज चैट, जहाँ लोग तस्वीरें साझा करते हैं और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हैं। प्रतिस्पर्धा पसंद न करने वाले कर्मचारियों के लिए चैलेंज बनाने के बारे में और पढ़ें।

YuMuuv में हम इस बारे में लगातार सोचते हैं। जो चैलेंज प्लेटफ़ॉर्म सिर्फ़ सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कृत करता है, वह प्रतिस्पर्धा का साधन है। जो हर किसी की भागीदारी को सामने लाता है और उसे अहमियत देता है, वह संस्कृति बनाने का साधन है। यह फ़र्क मायने रखता है।

एक बार की पहल से परंपरा तक

वेलनेस चैलेंज का सबसे असरदार रूप एक परंपरा बन जाना है। ऐसा एक बार का आयोजन नहीं, जिसे HR जनवरी में शुरू करे और मार्च तक भूल जाए, बल्कि नियमित रूप से होने वाली ऐसी पहल, जिसका लोग सचमुच इंतज़ार करें।

मैंने ऐसा तब होते देखा है, जब कंपनियाँ एक नियमित सिलसिला अपनाती हैं — हर महीने एक नया चैलेंज, हर बार एक अलग थीम। जनवरी में आभार। फ़रवरी में पर्याप्त पानी पीना। मार्च में नींद। अप्रैल में सामाजिक जुड़ाव। समय के साथ ये "वेलनेस प्रोग्राम" नहीं रह जाते, बल्कि कंपनी के काम करने के तरीके का हिस्सा बन जाते हैं। कैलेंडर में इनकी एक खास जगह बन जाती है। लोग इनके बारे में पूछते हैं। इनके लिए योजना बनाते हैं। नए कर्मचारियों को भी शुरुआत से ही इनसे जोड़ा जाता है। ऐसा तैयार सिलसिला अपनाने के लिए 12 महीने का वेलनेस चैलेंज कैलेंडर देखें।

यही संस्कृति है। वह नहीं, जिसे आप ब्रेक रूम के पोस्टर पर लिख दें। बल्कि वह, जो लोगों के रोज़मर्रा के आपसी व्यवहार में जीती है।

हमारे ग्राहकों को भी यही अनुभव होता है। Shell Slovakia and Czechia में हर साल होने वाला 90 दिन का वॉकिंग चैलेंज कंपनी का सबसे बड़ा खेल आयोजन बन गया है (केस स्टडी पढ़ें)। Slalom में फ़ीनिक्स से शुरू हुआ एक छोटा-सा स्टेप चैलेंज सितंबर की वैश्विक परंपरा बन गया, जिसका लोग हर साल इंतज़ार करते हैं (केस स्टडी पढ़ें)। और DHR Global दुनिया भर के कर्मचारियों को रैंडम तरीके से टीमों में बाँटता है, ताकि वे 50 से अधिक कार्यालयों के सहकर्मियों से जुड़ सकें (केस स्टडी पढ़ें)।

असली पैमाना

अगर आप वेलनेस चैलेंज चला रहे हैं और सिर्फ़ कदम या भागीदारी दर माप रहे हैं, तो आप गलत डैशबोर्ड देख रहे हैं। सबसे अहम पैमाने वे हैं, जिन्हें गिनना मुश्किल है, लेकिन जिनका दिखावा करना नामुमकिन है।

क्या लोग ऐसे सहकर्मियों से बात कर रहे हैं, जिनसे वे आम तौर पर बात नहीं करते? क्या नए कर्मचारी जल्दी घुल-मिल रहे हैं? क्या आपकी टीम पिछले महीने के चैलेंज को लेकर ऐसे मज़ाक करने लगी है, जिन्हें सिर्फ़ टीम के लोग समझते हैं? क्या मैनेजरों को अलगाव की बातें कम और आपसी दोस्ती की बातें ज़्यादा सुनने को मिल रही हैं? क्या भाग लेने वाली टीमों में कर्मचारियों का नौकरी छोड़ना कम हो रहा है?

ये संस्कृति के संकेत हैं। और इनकी शुरुआत एक साझा लक्ष्य, थोड़ी दोस्ताना प्रतिस्पर्धा और इस संदेश से होती है कि आपकी कंपनी अपने लोगों को सिर्फ़ कर्मचारियों की गिनती भर नहीं मानती।

लीडरबोर्ड तो बस शुरुआत है। आप असल में ऐसी जगह बना रहे हैं, जहाँ लोग आना चाहें — इसलिए नहीं कि उन्हें आना पड़ता है, बल्कि इसलिए कि उन्हें वहाँ अपनापन महसूस होता है।

देखना चाहते हैं कि दूसरी कंपनियों ने चैलेंज को संस्कृति का हिस्सा कैसे बनाया? चैलेंज का असर पढ़ें, हमारे ग्राहकों की कहानियाँ देखें या YuMuuv का डेमो बुक करें।

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